12 Jan 2017

Swami Vivekanand Janm Jayanti Ke Avsar Par Unki Full Info Hindi Mai

स्वामी विवेकानन्द जी जयंती 12 जनवरी!!

स्वामी विवेकानंद जी आधुनिक भारत के एक महान चिंतक, दार्शनिक, युवा संन्यासी, युवाओं के प्रेरणास्त्रोत और एक आदर्श व्यक्तित्व के धनी थे । विवेकानंद दो शब्दों द्वारा बना है। विवेक+आनंद । विवेक संस्कृत मूल का शब्द है। विवेक का अर्थ होता है बुद्धि और आनंद का शब्दिक अर्थ होता है- खुशियों

स्वामी विवेकानन्द जी का जन्म 12 जनवरी सन 1863  (विद्वानों के अनुसार #मकर संक्रान्ति संवत 1920) को #कलकत्ता में एक कायस्थ परिवार में हुआ था। उनके बचपन का नाम #नरेन्द्रनाथ दत्त था। पिता विश्वनाथ दत्त कलकत्ता हाईकोर्ट के एक प्रसिद्ध वकील थे।

  दुर्गाचरण दत्ता, (नरेंद्र के दादा) संस्कृत और फारसी के विद्वान थे उन्होंने अपने #परिवार को 25 वर्ष की उम्र में छोड़ दिया और साधु बन गए।

उनकी माता भुवनेश्वरी देवी धार्मिक विचारों की महिला थी। उनका अधिकांश समय भगवान शिव की पूजा-अर्चना में व्यतीत होता था। नरेंद्र के पिता और उनकी माँ के धार्मिक, #प्रगतिशील व तर्कसंगत रवैये ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को आकार देने में मदद की ।

बचपन से ही #नरेन्द्र अत्यन्त कुशाग्र बुद्धि के तो थे ही नटखट भी थे। अपने साथी बच्चों के साथ वे खूब शरारत करते और मौका मिलने पर अपने अध्यापकों के साथ भी शरारत करने से नहीं चूकते थे। उनके घर में नियमपूर्वक रोज पूजा-पाठ होता था धार्मिक प्रवृत्ति की होने के कारण माता भुवनेश्वरी देवी को पुराण, रामायण, महाभारत आदि की कथा सुनने का बहुत शौक था। संत इनके घर आते रहते थे। नियमित रूप से #भजन-कीर्तन भी होता रहता था। #परिवार के धार्मिक एवं आध्यात्मिक वातावरण के प्रभाव से #बालक नरेन्द्र के मन में बचपन से ही धर्म एवं अध्यात्म के संस्कार गहरे होते गये। माता-पिता के संस्कारों और धार्मिक वातावरण के कारण बालक के मन में बचपन से ही #ईश्वर को जानने और उसे प्राप्त करने की लालसा दिखायी देने लगी थी। ईश्वर के बारे में जानने की उत्सुकता में कभी-कभी वे ऐसे प्रश्न पूछ बैठते थे कि इनके माता-पिता और कथावाचक पण्डितजी तक चक्कर में पड़ जाते थे।

स्वामी विवेकानन्द जी की शिक्षा..!!

सन् 1871 में, आठ साल की उम्र में नरेंद्रनाथ ने #ईश्वर चंद्र विद्यासागर के मेट्रोपोलिटन संस्थान में दाखिला लिया जहाँ वे स्कूल गए। 1877 में उनका परिवार रायपुर चला गया। 1879 में कलकत्ता में अपने परिवार की वापसी के बाद, वह एकमात्र छात्र थे जिन्होंने प्रेसीडेंसी कॉलेज प्रवेश परीक्षा में प्रथम डिवीजन अंक प्राप्त किये ।

वे दर्शन, धर्म, इतिहास, सामाजिक विज्ञान, कला और साहित्य सहित विषयों के एक #उत्साही पाठक थे।इनकी वेद, उपनिषद, भगवद् गीता, रामायण, महाभारत और पुराणों के अतिरिक्त अनेक हिन्दू शास्त्रों में गहन रूचि थी। नरेंद्र को #भारतीय शास्त्रीय संगीत में प्रशिक्षित किया गया था और ये नियमित रूप से शारीरिक व्यायाम में व खेलों में भाग लिया करते थे। नरेंद्र ने पश्चिमी तर्क, पश्चिमी दर्शन और यूरोपीय इतिहास का अध्ययन जनरल असेंबली इंस्टिटूशन (अब स्कॉटिश चर्च कॉलेज) में किया। 1881 में इन्होंने ललित कला की परीक्षा उत्तीर्ण की, और 1884 में कला स्नातक की डिग्री पूरी कर ली।

नरेंद्र ने डेविड ह्यूम, इमैनुएल कांट, जोहान गोटलिब फिच, बारूक स्पिनोजा, जोर्ज डब्लू एच हेजेल, आर्थर स्कूपइन्हार , ऑगस्ट कॉम्टे, जॉन स्टुअर्ट मिल और चार्ल्स डार्विन के कामों का अध्यन किया। उन्होंने स्पेंसर की किताब एजुकेशन (1861) का बंगाली में अनुवाद किया।  ये हर्बर्ट स्पेंसर के विकासवाद से काफी मोहित थे।  #पश्चिम दार्शनिकों के अध्यन के साथ ही इन्होंने संस्कृत ग्रंथों और बंगाली साहित्य को भी सीखा।विलियम हेस्टी (महासभा संस्था के प्रिंसिपल) ने लिखा, "नरेंद्र वास्तव में एक जीनियस है। मैंने काफी विस्तृत और बड़े इलाकों में यात्रा की है लेकिन उनकी जैसी प्रतिभा वाला एक भी बालक कहीं नहीं देखा यहाँ तक कि जर्मन #विश्वविद्यालयों के दार्शनिक छात्रों में भी नहीं।" अनेक बार इन्हें श्रुतिधर( विलक्षण स्मृति वाला एक व्यक्ति) भी कहा गया है।

स्वामी विवेकानन्द जी की आध्यात्मिक शिक्षुता - ब्रह्म समाज का प्रभाव!!

1880 में नरेंद्र ईसाई से हिन्दू धर्म में रामकृष्ण के प्रभाव से परिवर्तित केशव चंद्र सेन की नव विधान में शामिल हुए, नरेंद्र 1884 से पहले कुछ बिंदु पर, एक फ्री मसोनरी लॉज और साधारण #ब्रह्म समाज जो ब्रह्म समाज का ही एक अलग गुट था और जो केशव चंद्र सेन और देवेंद्रनाथ टैगोर के नेतृत्व में था। 1881-1884 के दौरान ये सेन्स बैंड ऑफ़ होप में भी सक्रीय रहे जो धूम्रपान और शराब पीने से युवाओं को हतोत्साहित करता था।

यह नरेंद्र के परिवेश के कारण पश्चिमी आध्यात्मिकता के साथ परिचित हो गया था। उनके प्रारंभिक विश्वासों को ब्रह्म समाज ने (जो एक निराकार ईश्वर में विश्वास और मूर्ति पूजा का प्रतिवाद करते थे) ने प्रभावित किया और सुव्यवस्थित, युक्तिसंगत, अद्वैतवादी अवधारणाओं , धर्मशास्त्र ,वेदांत और उपनिषदों के एक चयनात्मक और आधुनिक ढंग से अध्ययन पर प्रोत्साहित किया।

स्वामी विवेकानन्द जी की निष्ठा..!!

एक बार किसी #शिष्य ने #गुरुदेव की #सेवा में घृणा और निष्क्रियता दिखाते हुए नाक-भौं सिकोड़ीं। यह देखकर विवेकानन्द को क्रोध आ गया। वे अपने उस गुरु भाई को सेवा का पाठ पढ़ाते और गुरुदेव की प्रत्येक वस्तु के प्रति प्रेम दर्शाते हुए उनके बिस्तर के पास रक्त, कफ आदि से भरी थूकदानी उठाकर पी गये । #गुरु के प्रति ऐसी अनन्य भक्ति और निष्ठा के प्रताप से ही वे अपने गुरु के शरीर और उनके दिव्यतम आदर्शों की उत्तम सेवा कर सके। गुरुदेव को समझ सके और स्वयं के अस्तित्व को गुरुदेव के स्वरूप में विलीन कर सके। और आगे चलकर समग्र विश्व में #भारत के अमूल्य आध्यात्मिक भण्डार की महक फैला सके।

 ऐसी थी उनके इस #महान व्यक्तित्व की नींव में गुरुभक्ति, गुरुसेवा और गुरु के प्रति अनन्य निष्ठा जिसका परिणाम सारे संसार ने देखा।

स्वामी विवेकानन्द अपना जीवन अपने #गुरुदेव #रामकृष्ण परमहंस को समर्पित कर चुके थे। उनके गुरुदेव का शरीर अत्यन्त रुग्ण हो गया था। गुरुदेव के शरीर-त्याग के दिनों में अपने घर और #कुटुम्ब की नाजुक हालत व स्वयं के भोजन की चिन्ता किये बिना वे गुरु की सेवा में सतत संलग्न रहे।

विवेकानन्द बड़े स्‍वप्न‍दृष्‍टा थे। #उन्‍होंने एक ऐसे समाज की कल्‍पना की थी जिसमें धर्म या जाति के आधार पर मनुष्‍य-मनुष्‍य में कोई भेद न रहे। उन्‍होंने वेदान्त के सिद्धान्तों को इसी रूप में रखा। अध्‍यात्‍मवाद बनाम भौतिकवाद के विवाद में पड़े बिना भी यह कहा जा सकता है कि समता के सिद्धान्त का जो आधार विवेकानन्‍द ने दिया उससे सबल बौद्धिक आधार शायद ही ढूँढा जा सके। #विवेकानन्‍द को युवकों से बड़ी आशाएँ थी।
आज के युवकों के लिये इस ओजस्‍वी सन्‍यासी का जीवन एक आदर्श है।

स्वामी विवेकानन्द जी यात्राएँ!!

25 वर्ष की अवस्था में नरेन्द्र ने गेरुआ वस्त्र धारण कर लिया था । तत्पश्चात उन्होंने पैदल ही पूरे #भारतवर्ष की यात्रा की। सन्‌ 1893 में शिकागो (अमरीका) में विश्व धर्म परिषद् हो रही थी। स्वामी विवेकानन्द उसमें भारत के प्रतिनिधि के रूप में पहुँचे। यूरोप-अमरीका के लोग उस समय पराधीन भारतवासियों को बहुत हीन दृष्टि से देखते थे।

वहाँ लोगों ने बहुत प्रयत्न किया कि स्वामी विवेकानन्द को सर्वधर्म परिषद् में बोलने का समय ही न मिले। परन्तु एक अमेरिकन प्रोफेसर के प्रयास से उन्हें थोड़ा समय मिला। उस परिषद् में उनके विचार सुनकर सभी विद्वान चकित हो गये। फिर तो अमरीका में उनका अत्यधिक स्वागत हुआ। वहाँ उनके भक्तों का एक बड़ा समुदाय बन गया। तीन वर्ष वे #अमरीका में रहे और वहाँ के लोगों को भारतीय तत्वज्ञान की अद्भुत ज्योति प्रदान की। उनकी वक्तृत्व-शैली तथा ज्ञान को देखते हुए वहाँ के मीडिया ने उन्हें साइक्लॉनिक हिन्दू का नाम दिया।

"अध्यात्म-विद्या और भारतीय दर्शन के बिना विश्व अनाथ हो जायेगा" यह स्वामी विवेकानन्द का दृढ़ विश्वास था। अमरीका में उन्होंने #रामकृष्ण मिशन की अनेक #शाखाएँ स्थापित कीं। अनेक अमरीकी विद्वानों ने उनका शिष्यत्व ग्रहण किया। वे सदा अपने को 'गरीबों का सेवक' कहते थे। भारत के गौरव को देश-देशान्तरों में उज्ज्वल करने का उन्होंने सदा प्रयत्न किया।

स्वामी विवेकानन्दजी का योगदान !!

39 वर्ष के संक्षिप्त जीवनकाल में स्वामी #विवेकानन्द जो काम कर गये वे आने वाली अनेक शताब्दियों तक पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

तीस वर्ष की आयु में स्वामी #विवेकानन्द ने #शिकागो, अमेरिका के #विश्व धर्म सम्मेलन में हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व किया और उसे सार्वभौमिक पहचान दिलवायी।

गुरुदेव रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने एक बार कहा था-"यदि आप भारत को जानना चाहते हैं तो विवेकानन्द को पढ़िये। उनमें आप सब कुछ सकारात्मक ही पायेंगे, नकारात्मक कुछ भी नहीं।"

रोमारोला ने उनके बारे में कहा था-"उनके द्वितीय होने की कल्पना करना भी असम्भव है, वे जहाँ भी गये, सर्वप्रथम ही रहे। हर कोई उनमें अपने नेता का दिग्दर्शन करता था। वे ईश्वर के प्रतिनिधि थे और सब पर प्रभुत्व प्राप्त कर लेना ही उनकी विशिष्टता थी।

हिमालय प्रदेश में एक बार एक अनजान यात्री उन्हें देख ठिठक कर रुक गया और आश्चर्यपूर्वक चिल्ला उठा-‘शिव!’ यह ऐसा हुआ मानो उस व्यक्ति के #आराध्य देव ने अपना नाम उनके माथे पर लिख दिया हो।"


वे केवल सन्त ही नहीं, एक #महान देशभक्त, वक्ता, विचारक, लेखक और मानव-प्रेमी भी थे। अमेरिका से लौटकर उन्होंने #देशवासियों को आह्वान करते हुए कहा था-"नया भारत निकल पड़े मोची की दुकान से, भड़भूँजे के भाड़ से, कारखाने से, हाट से, बाजार से; निकल पडे झाड़ियों, जंगलों, पहाड़ों, पर्वतों से।" और जनता ने स्वामीजी की पुकार का उत्तर दिया। वह गर्व के साथ निकल पड़ी। #गान्धीजी को आजादी की लड़ाई में जो जन-समर्थन मिला, वह विवेकानन्द के आह्वान का ही फल था।

इस प्रकार वे #भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम के भी एक प्रमुख प्रेरणा-स्रोत बने। उनका विश्वास था कि पवित्र भारतवर्ष धर्म एवं दर्शन की पुण्यभूमि है। यहीं बड़े-बड़े महात्माओं व ऋषियों का जन्म हुआ, यही संन्यास एवं त्याग की भूमि है तथा यहीं-केवल यहीं-आदिकाल से लेकर आज तक मनुष्य के लिये जीवन के सर्वोच्च आदर्श एवं मुक्ति का द्वार खुला हुआ है।

उनके कथन-"‘उठो, जागो, स्वयं जागकर औरों को जगाओ। अपने नर-जन्म को सफल करो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाये।"

उन्नीसवीं सदी के आखिरी वर्षोँ में विवेकानन्द लगभग सशस्त्र या हिंसक क्रान्ति के जरिये भी देश को आजाद करना चाहते थे। परन्तु उन्हें जल्द ही यह विश्वास हो गया था कि परिस्थितियाँ उन इरादों के लिये अभी परिपक्व नहीं हैं। इसके बाद ही विवेकानन्द जी ने ‘एकला चलो‘ की नीति का पालन करते हुए एक परिव्राजक के रूप में भारत और दुनिया को खंगाल डाला।

उन्होंने कहा था कि #मुझे बहुत से युवा संन्यासी चाहिये जो भारत के ग्रामों में फैलकर देशवासियों की सेवा में खप जायें।  विवेकानन्दजी पुरोहितवाद, धार्मिक आडम्बरों, कठमुल्लापन और रूढ़ियों के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने धर्म को मनुष्य की सेवा के केन्द्र में रखकर ही आध्यात्मिक चिंतन किया था। उनका हिन्दू धर्म अटपटा, लिजलिजा और वायवीय नहीं था।

विवेकानन्द जी इस बात से आश्वस्त थे कि #धरती की गोद में यदि ऐसा कोई देश है जिसने मनुष्य की हर तरह की बेहतरी के लिए ईमानदार कोशिशें की हैं, तो वह भारत ही है।

उन्होंने पुरोहितवाद, ब्राह्मणवाद, धार्मिक कर्मकाण्ड और रूढ़ियों की खिल्ली भी उड़ायी और लगभग आक्रमणकारी भाषा में ऐसी विसंगतियों के खिलाफ युद्ध भी किया। उनकी दृष्टि में हिन्दू धर्म के #सर्वश्रेष्ठ चिन्तकों के विचारों का निचोड़ पूरी दुनिया के लिए अब भी ईर्ष्या का विषय है। #स्वामीजी ने संकेत दिया था कि विदेशों में भौतिक समृद्धि तो है और उसकी भारत को जरूरत भी है लेकिन हमें याचक नहीं बनना चाहिये। हमारे पास उससे ज्यादा बहुत कुछ है जो हम पश्चिम को दे सकते हैं और पश्चिम को उसकी बेसाख्ता जरूरत है।

यह स्वामी विवेकानन्द का अपने देश की धरोहर के लिये दम्भ या बड़बोलापन नहीं था। यह एक वेदान्ती #साधु की भारतीय सभ्यता और संस्कृति की तटस्थ, वस्तुपरक और मूल्यगत आलोचना थी। बीसवीं सदी के इतिहास ने बाद में उसी पर मुहर लगायी।

स्वामी विवेकानन्द जी की महासमाधि!!

विवेकानंद #ओजस्वी और सारगर्भित व्याख्यानों की प्रसिद्धि #विश्व भर में है। जीवन के अन्तिम दिन उन्होंने शुक्ल यजुर्वेद की व्याख्या की और कहा-"एक और विवेकानन्द चाहिये, यह समझने के लिये कि इस #विवेकानन्द ने अब तक क्या किया है।" उनके शिष्यों के अनुसार जीवन के अन्तिम दिन 4 जुलाई 1902 को भी उन्होंने अपनी ध्यान करने की दिनचर्या को नहीं बदला और प्रात: दो तीन घण्टे ध्यान किया और ध्यानावस्था में ही अपने ब्रह्मरन्ध्र को भेदकर #महासमाधि ले ली। बेलूर में #गंगा तट पर चन्दन की चिता पर उनकी अंत्येष्टि की गयी। #इसी गंगा तट के दूसरी ओर उनके गुरु रामकृष्ण परमहंस का सोलह वर्ष पूर्व अन्तिम संस्कार हुआ था।

उनके शिष्यों और अनुयायियों ने उनकी स्मृति में वहाँ एक #मन्दिर बनवाया और समूचे विश्व में विवेकानन्द तथा उनके गुरु #रामकृष्ण के सन्देशों के प्रचार के लिये 130 से अधिक केन्द्रों की स्थापना की।

स्वामी विवेकानन्द जी की महत्त्वपूर्ण तिथियाँ!!

12 जनवरी 1863 -- कलकत्ता में जन्म

1879 -- प्रेसीडेंसी कॉलेज कलकत्ता में प्रवेश

1880 -- जनरल असेम्बली इंस्टीट्यूशन में प्रवेश

नवंबर 1881 -- रामकृष्ण परमहंस से प्रथम भेंट

1882-86 -- रामकृष्ण परमहंस से सम्बद्ध

1884 -- स्नातक परीक्षा उत्तीर्ण; पिता का स्वर्गवास

1885 -- रामकृष्ण परमहंस की अन्तिम बीमारी

16 अगस्त 1886 -- रामकृष्ण परमहंस का निधन

1886 -- वराहनगर मठ की स्थापना

जनवरी 1887 -- वराह नगर मठ में संन्यास की औपचारिक प्रतिज्ञा

1890-93 -- परिव्राजक के रूप में भारत-भ्रमण

25 दिसम्बर 1892 -- कन्याकुमारी में

13 फ़रवरी 1893 -- प्रथम सार्वजनिक व्याख्यान सिकन्दराबाद में

31 मई 1893 -- मुम्बई से अमरीका रवाना

25 जुलाई 1893 -- वैंकूवर, कनाडा पहुँचे

30 जुलाई 1893 -- शिकागो आगमन

अगस्त 1893 -- हार्वर्ड विश्वविद्यालय के प्रो॰ जॉन राइट से भेंट

11 सितम्बर 1893 -- विश्व धर्म सम्मेलन, शिकागो में प्रथम व्याख्यान

27 सितम्बर 1893 -- विश्व धर्म सम्मेलन, शिकागो में अन्तिम व्याख्यान

16 मई 1894 -- हार्वर्ड विश्वविद्यालय में संभाषण

नवंबर 1894 -- न्यूयॉर्क में वेदान्त समिति की स्थापना

जनवरी 1895 -- न्यूयॉर्क में धार्मिक कक्षाओं का संचालन आरम्भ

अगस्त 1895 -- पेरिस में

अक्टूबर 1895 -- लन्दन में व्याख्यान

6 दिसम्बर 1895 -- वापस न्यूयॉर्क

22-25 मार्च 1896 -- फिर लन्दन

मई-जुलाई 1896 -- हार्वर्ड विश्वविद्यालय में व्याख्यान

15 अप्रैल 1896 -- वापस लन्दन

मई-जुलाई 1896 -- लंदन में धार्मिक कक्षाएँ

28 मई 1896 -- ऑक्सफोर्ड में मैक्समूलर से भेंट

30 दिसम्बर 1896 -- नेपाल से भारत की ओर रवाना

15 जनवरी 1897 -- कोलम्बो, श्रीलंका आगमन

जनवरी, 1897 -- रामनाथपुरम् (रामेश्वरम) में जोरदार स्वागत एवं भाषण

6-15 फ़रवरी 1897 -- मद्रास में

19 फ़रवरी 1897 -- कलकत्ता आगमन

1 मई 1897 -- रामकृष्ण मिशन की स्थापना

मई-दिसम्बर 1897 -- उत्तर भारत की यात्रा

जनवरी 1898 -- कलकत्ता वापसी

19 मार्च 1899 -- मायावती में अद्वैत आश्रम की स्थापना

20 जून 1899 -- पश्चिमी देशों की दूसरी यात्रा

31 जुलाई 1899 -- न्यूयॉर्क आगमन

22 फरवरी 1900 -- सैन फ्रांसिस्को में वेदान्त समिति की स्थापना

जून 1900 -- न्यूयॉर्क में अन्तिम कक्षा

26 जुलाई 1900 -- यूरोप रवाना

24 अक्टूबर 1900 -- विएना, हंगरी, कुस्तुनतुनिया, ग्रीस, मिस्र आदि देशों की यात्रा

26 नवम्बर 1900 -- भारत रवाना

9 दिसम्बर 1900 -- बेलूर मठ आगमन

10 जनवरी 1901 -- मायावती की यात्रा

मार्च-मई 1901 -- पूर्वी बंगाल और असम की तीर्थयात्रा

जनवरी-फरवरी 1902 -- बोध गया और वाराणसी की यात्रा

मार्च 1902 -- बेलूर मठ में वापसी

4 जुलाई 1902 -- महासमाधि!!

Read More »

8 Jan 2017

Hindu Sanskriti Ni Full Jankari Gujarati Ma Janral Nolej Special

ભારતીય સંસ્કૃતિ    ના 
મૂલ્યો અને આધ્યાત્મિક વારસા થી અવગત બનીએ.

(1) હિન્દુધર્મ પ્રમાણે માનવજીવનના સોળ સંસ્કારો : 

1. ગર્ભાધાન સંસ્કાર 
2. પુંસવન સંસ્કાર 
3. સીમંતોન્ન્યન સંસ્કાર 
4. જાતકર્મ સંસ્કાર 
5. નામકરણ સંસ્કાર 
6. નિષ્ક્રમણ સંસ્કાર 
7. અન્નપ્રાશન સંસ્કાર 
8. વપન (ચૂડાકર્મ) સંસ્કાર 
9. કર્ણવેધ સંસ્કાર 
10. ઉપનયન સંસ્કાર 
11. વેદારંભ સંસ્કાર 
12. કેશાન્ત સંસ્કાર 
13. સમાવર્તન સંસ્કાર 
14. વિવાહ સંસ્કાર 
15. વિવાહગ્નિપરિગ્રહ સંસ્કાર 
16. અગ્નિ સંસ્કાર

 (2) હિન્દુધર્મના ઉત્સવો :

 1. નૂતન વર્ષારંભ 
2. ભાઈબીજ 
3. લાભપાંચમ 
4. દેવદિવાળી 
5. ગીતા જયંતિ (માગસર સુદ એકાદશી)
 6. ઉત્તરાયણ અને મકરસંક્રાંતિ 
7. વસંત પંચમી
 8. શિવરાત્રી 
9. હોળી 
10. રામનવમી 
11. અખાત્રીજ 
12. વટસાવિત્રી (જેઠ પૂર્ણિમા) 
13. અષાઢી બીજ 
14. ગુરુ પૂર્ણિમા 
15. શ્રાવણી-રક્ષાબંધન 
16. જન્માષ્ટમી 
17. ગણેશ ચતુર્થી 
18. શારદીય નવરાત્રી 
19. વિજ્યા દશમી 
20. શરદપૂર્ણિમા 
21. ધનતેરસ 
22. દીપાવલી. 

(3) હિન્દુ – તીર્થો : ભારતના ચાર ધામ :

 1. દ્વારિકા 
2. જગન્નાથપુરી 
3. બદરીનાથ 
4. રામેશ્વર 

હિમાલય ના ચાર ધામ : 

1. યમુનોત્રી 
2. ગંગોત્રી 
3. કેદારનાથ 
4. બદરીનાથ 

હિમાલયના પાંચ કેદાર :

1. કેદારનાથ 
2. મદમહેશ્વર 
3. તુંગનાથ 
4. રુદ્રનાથ 
5. કલ્પેશ્વર 

ભારતની સાત પવિત્ર પુરી : 

1. અયોધ્યા 
2. મથુરા 
3. હરિદ્વાર 
4. કાશી 
5. કાંચી 
6.. અવંતિકા 
7. દ્વારિકા

 દ્વાદશ જ્યોતિલિંગ :

 1. મલ્લિકાર્જુન (શ્રી શૈલ – આંધ્ર પ્રદેશ)
 2. સોમનાથ (પ્રભાસ પાટણ – ગુજરાત) 
3. મહાકાલ (ઉજ્જૈન –મધ્યપ્રદેશ) 
4. વૈદ્યનાથ (પરલી-મહારાષ્ટ્ર) 
5. ઓમકારેશ્વર (મધ્યપ્રદેશ) 
6. ભીમાશંકર (મહારાષ્ટ્ર) 
7. ત્ર્યંબકેશ્વર (મહારાષ્ટ્ર) 
8. નાગનાથ (દ્વારિકા પાસે – ગુજરાત)
 9. કાશી વિશ્વનાથ (કાશી – ઉત્તરપ્રદેશ) 
10. રામેશ્વર (તમિલનાડુ) 
11. કેદારનાથ (ઉત્તરાંચલ) 
12. ઘૃષ્ણેશ્વર (દેવગિરિ-મહારાષ્ટ્ર) 

અષ્ટવિનાયક ગણપતિ :

1. ઢુંઢીરાજ – વારાણસી 
2. મોરેશ્વર-જેજૂરી 
3. સિધ્ધટેક 
4. પહ્માલય 
5. રાજૂર 
6. લેહ્યાદ્રિ 
7. ઓંકાર ગણપતિ – પ્રયાગરાજ 
8. લક્ષવિનાયક – ઘુશ્મેશ્વર

 શિવની અષ્ટમૂર્તિઓ : 

1. સૂર્યલિંગ કાશ્મીરનું માર્તડ મંદિર / ઓરિસ્સાનું કોર્ણાક મંદિર / ગુજરાતનું મોઢેરાનું મંદિર 
2. ચંદ્રલિંગ – સોમનાથ મંદિર 
3. યજમાન લિંગ – પશુપતિનાથ (નેપાલ) 
4. પાર્થિવલિંગ – એકામ્રેશ્વર (શિવકાંશી) 
5. જલલિંગ – જંબુકેશ્વર (ત્રિચિનાપલ્લી) 
6. તેજોલિંગ – અરુણાચલેશ્વર (તિરુવન્નુમલાઈ)
 7. વાયુલિંગ – શ્રી કાલહસ્તીશ્વર 
8. આકાશલિંગ – નટરાજ (ચિદંબરમ) 

પ્રસિધ્ધ 24 શિવલિંગ :

 1. પશુપતિનાથ (નેપાલ) 
2. સુંદરેશ્વર (મદુરા) 
3. કુંભેશ્વર (કુંભકોણમ) 
4. બૃહદીશ્વર (તાંજોર) 
5. પક્ષીતીર્થ (ચેંગલપેટ)
 6. મહાબળેશ્વર (મહારાષ્ટ્ર) 
7. અમરનાથ (કાશ્મીર) 
8. વૈદ્યનાથ (કાંગજા) 
9. તારકેશ્વર (પશ્ચિમ બંગાળ) 
10. ભુવનેશ્વર (ઓરિસ્સા) 
11. કંડારિયા શિવ (ખાજુરાહો)
 12. એકલિંગજી (રાજસ્થાન) 
13. ગૌરીશંકર (જબલપુર) 
14. હરીશ્વર (માનસરોવર) 
15. વ્યાસેશ્વર (કાશી) 
16. મધ્યમેશ્વર (કાશી)
 17. હાટકેશ્વર (વડનગર) 
18. મુક્તપરમેશ્વર (અરુણાચલ) 
19. પ્રતિજ્ઞેશ્વર (કૌંચ પર્વત) 
20. કપાલેશ્વર (કૌંચ પર્વત) 
21.કુમારેશ્વર (કૌંચ પર્વત) 
22. સર્વેશ્વર (ચિત્તોડ)
23. સ્તંભેશ્વર (ચિત્તોડ) 2
4. અમરેશ્વર (મહેન્દ્ર પર્વત) 

સપ્ત બદરી : 

1. બદરીનારાયણ 
2. ધ્યાનબદરી 
3. યોગબદરી 
4. આદિ બદરી 
5. નૃસિંહ બદરી 
6. ભવિષ્ય બદરી
 7.. વૃધ્ધ બદરી. 

પંચનાથ :

 1. બદરીનાથ 
2. રંગનાથ 
3. જગન્નાથ 
4. દ્વારિકાનાથ 
5. ગોવર્ધનનાથ 

પંચકાશી : 

1. કાશી (વારાણસી) 
2. ગુપ્તકાશી (ઉત્તરાખંડ) 
3. ઉત્તરકાશી (ઉત્તરાખંડ)
 4. દક્ષિણકાશી (તેનકાશી – તમિલનાડુ) 
5. શિવકાશી 

સપ્તક્ષેત્ર 

: 1. કુરુક્ષેત્ર (હરિયાણા) 
2. હરિહિર ક્ષેત્ર (સોનપુર-બિહાર) 
3. પ્રભાસ ક્ષેત્ર (સોમનાથ – ગુજરાત)
 4. રેણુકા ક્ષેત્ર (મથુરા પાસે, ઉત્તરપ્રદેશ) 
5. ભૃગુક્ષેત્ર (ભરૂચ-ગુજરાત) 
6. પુરુષોત્તમ ક્ષેત્ર (જગન્નાથપુરી – ઓરિસ્સા) 
7. સૂકરક્ષેત્ર (સોરોં – ઉત્તરપ્રદેશ) 

પંચ સરોવર :

 1. બિંદુ સરોવર (સિધ્ધપુર – ગુજરાત) 
2. નારાયણ સરોવર (કચ્છ) 
3. પંપા સરોવર (કર્ણાટક) 
4. પુષ્કર સરોવર (રાજસ્થાન) 
5. માનસ સરોવર (તિબેટ) 

નવ અરણ્ય (વન)  : 

1. દંડકારણ્ય (નાસિક) 
2. સૈન્ધાવારણ્ય (સિન્ધુ નદીના કિનારે)
3. નૈમિષારણ્ય (સીતાપુર – ઉત્તરપ્રદેશ) 
4. કુરુ-મંગલ (કુરુક્ષેત્ર – હરિયાણા) 
5. કુરુ-મંગલ (કુરુક્ષેત્ર – હરિયાણા) 
6. ઉત્પલાવર્તક (બ્રહ્માવર્ત – કાનપુર) 
7. જંબૂમાર્ગ (શ્રી રંગનાથ – ત્રિચિનાપલ્લી) 
8. અર્બુદારણ્ય (આબુ) 
9. હિમવદારણ્ય (હિમાલય) 

ચૌદ પ્રયાગ :

 1. પ્રયાગરાજ (ગંગા,યમુના, સરસ્વતી)
 2. દેવપ્રયાગ (અલકનંદા, ભાગીરથી)
 3. રુદ્રપ્રયાગ (અલકનંદા, મંદાકિની) 
4. કર્ણપ્રયાગ (અલકનંદા, પિંડારગંગા) 
5. નંદપ્રયાગ (અલકનંદા, નંદા)
 6. વિષ્ણુપ્રયાગ (અલકનંદા, વિષ્ણુગંગા) 
7. સૂર્યપ્રયાગ (મંદાકિની, અલસતરંગિણી) 
8. ઈન્દ્રપ્રયાગ (ભાગીરથી, વ્યાસગંગા) 
9. સોમપ્રયાગ (મંદાકિની, સોમગંગા) 
10. ભાસ્કર પ્રયાગ (ભાગીરથી, ભાસ્કરગંગા) 
11. હરિપ્રયાગ (ભાગીરથી, હરિગંગા) 
12. ગુપ્તપ્રયાગ (ભાગીરથી, નીલગંગા) 
13. શ્યામગંગા (ભાગીરથી, શ્યામગંગા) 
14. કેશવપ્રયાગ (ભાગીરથી, સરસ્વતી) 

પ્રધાન દેવીપીઠ : 

1. કામાક્ષી (કાંજીવરમ્ – તામિલનાડુ) 
2. ભ્રમરાંબા (શ્રીશૈલ –આંધ્રપ્રદેશ) 
3. કન્યાકુમારી (તામિલનાડુ)
 4. અંબાજી (ઉત્તર ગુજરાત)
 5. મહાલક્ષ્મી (કોલ્હાપુર, મહારાષ્ટ્ર) 
6. મહાકાલી (ઉજ્જૈન-મધ્યપ્રદેશ)
 7. લલિતા (પ્રયાગરાજ-ઉત્તરપ્રદેશ)
 8. વિંધ્યવાસિની (વિંધ્યાચલ-ઉત્તરપ્રદેશ)
 9. વિશાલાક્ષી (કાશી, ઉત્તરપ્રદેશ) 
10. મંગલાવતી (ગયા-બિહાર) 
11. સુંદરી (અગરતાલ, ત્રિપુરા) 
12. ગૃહેશ્વરી (ખટમંડુ-નેપાલ) 

શ્રી શંકરાચાર્ય દ્વારા સ્થાપિત પાંચ પીઠ : 

1. જ્યોતિષ્પીઠ (જોષીમઠ – ઉત્તરાંચલ) 
2. ગોવર્ધંપીઠ (જગન્નાથપુરી-ઓરિસ્સા)
 3. શારદાપીઠ (દ્વારિકા-ગુજરાત)
 4. શ્રૃંગેરીપીઠ (શ્રૃંગેરી – કર્ણાટક) 
5. કામોકોટિપીઠ (કાંજીવરમ – તામિલનાડુ) 

(4) ચાર પુરુષાર્થ :

 1. ધર્મ 
2. અર્થ
 3. કામ 
4. મોક્ષ 
વૈષ્ણવો ‘પ્રેમ’ને પંચમ પુરુષાર્થ ગણે છે. 

(5) ચાર આશ્રમ : 

1. બ્રહ્મચર્યાશ્રમ 
2. ગૃહસ્થાશ્રમ 
3. વાનપ્રસ્થાશ્રમ 
4. સંન્યાસાશ્રમ 

(6) હિન્દુ ધર્મની કેટલીક મુલ્યવાન પરંપરાઓ : 

1. યજ્ઞ
 2. પૂજન 
3. સંધ્યા 
4. શ્રાધ્ધ 
5. તર્પણ 
6. યજ્ઞોપવીત 
7. સૂર્યને અર્ધ્ય 
8. તીર્થયાત્રા 
9. ગોદાન 
10. ગોરક્ષા-ગોપોષણ 
11. દાન 
12.ગંગાસ્નાન 
13.યમુનાપાન
14. ભૂમિપૂજન – શિલાન્યાસ – વાસ્તુવિધિ 
15.સૂતક 
16.તિલક 
17.કંઠી – માળા 
18. ચાંદલો – ચૂડી – સિંદૂર 
19. નૈવેદ્ય 
20. મંદિરમાં દેવ દર્શન, આરતી દર્શન 
21. પીપળે પાણી રેડવું 
22. તુલસીને જળ આપવું 
23. અન્નદાન – અન્નક્ષેત્ર 

આપણા કુલ 4 વેદો છે. :

 ઋગવેદ 
સામવેદ 
અથર્વેદ 
યજુર્વેદ 

ભારતીય તત્વજ્ઞાનની આધારશીલા પ્રસ્થાનત્રયી કહેવાય જેમાં ત્રણ ગ્રંથોનો સમાવેશ થાય છે.: 

ઉપનીષદો 
બ્રમ્હસુત્ર 
શ્રીમદ ભગવદગીતા 

આપણા કુલ 6 શાસ્ત્ર છે.:

વેદાંગ 
સાંખ્ય 
નિરૂક્ત
વ્યાકરણ 
યોગ 
છંદ 

આપણી 7 નદી : 

ગંગા 
યમુના 
ગોદાવરી 
સરસ્વતી 
નર્મદા 
સિંધુ 
કાવેરી 

આપણા 18 પુરાણ : 

ભાગવતપુરાણ 
ગરૂડપુરાણ 
હરિવંશપુરાણ 
ભવિષ્યપુરાણ
 લિંગપુરાણ 
પદ્મપુરાણ 
બાવનપુરાણ 
બાવનપુરાણ 
કૂર્મપુરાણ 
બ્રહ્માવતપુરાણ
 મત્સ્યપુરાણ 
સ્કંધપુરાણ 
સ્કંધપુરાણ 
નારદપુરાણ 
કલ્કિપુરાણ 
અગ્નિપુરાણ 
શિવપુરાણ 
વરાહપુરાણ 

પંચામૃત : 

દૂધ 
દહીં 
ઘી 
મધ 
ખાંડ 

પંચતત્વ : 

પૃથ્વી 
જળ 
વાયુ 
આકાશ 
અગ્નિ 

ત્રણ ગુણ : 

સત્વ 
રજ 
તમસ 

ત્રણ દોષ :

 વાત 
પિત્ત 
કફ 

ત્રણ લોક : 

આકાશ 
મૃત્યુલોક 
પાતાળ 

સાત સાગર : 

ક્ષીરસાગર 
દૂધસાગર 
ધૃતસાગર 
પથાનસાગર 
મધુસાગર 
મદિરાસાગર 
લડુસાગર 

સાત દ્વીપ : 

જમ્બુદ્વીપ 
પલક્ષદ્વીપ 
કુશદ્વીપ
 પુષ્કરદ્વીપ
 શંકરદ્વીપ 
કાંચદ્વીપ 
શાલમાલીદ્વીપ 

ત્રણ દેવ : 

બ્રહ્મા 
વિષ્ણુ 
મહેશ 

ત્રણ જીવ : 

જલચર 
નભચર 
થલચર 

ત્રણ વાયુ

શીતલ
મંદ 
સુગંધ 

ચાર વર્ણ : 

બ્રાહ્મણ 
ક્ષત્રિય 
વૈશ્ય 
ક્ષુદ્ર 

ચાર ફળ

ધર્મ 
અર્થ 
કામ 
મોક્ષ 

ચાર શત્રુ : 

કામ 
ક્રોધ 
મોહ, 
લોભ 

ચાર આશ્રમ : 

બ્રહ્મચર્ય 
ગૃહસ્થ 
વાનપ્રસ્થ 
સંન્યાસ 

અષ્ટધાતુ : 

સોનું 
ચાંદી 
તાબું 
લોખંડ 
સીસુ 
કાંસુ 
પિત્તળ 
રાંગુ 

પંચદેવ : 

બ્રહ્મા 
વિષ્ણુ 
મહેશ 
ગણેશ 
સૂર્ય 

ચૌદ રત્ન : 

અમૃત 
ઐરાવત હાથી 
કલ્પવૃક્ષ 
કૌસ્તુભમણિ 
ઉચ્ચૈશ્રવા ઘોડો 
પાંચજન્ય શંખ 
ચન્દ્રમા 
ધનુષ 
કામધેનુ
ધનવન્તરિ 
રંભા અપ્સરા 
લક્ષ્મીજી 
વારુણી 
વૃષ 

નવધા ભક્તિ :

 શ્રવણ 
કીર્તન 
સ્મરણ 
પાદસેવન 
અર્ચના 
વંદના 
મિત્ર 
દાસ્ય 
આત્મનિવેદન 

ચૌદભુવન :

તલ 
અતલ 
વિતલ 
સુતલ 
સસાતલ 
પાતાલ 
ભુવલોક
 ભુલૌકા 
સ્વર્ગ 
મૃત્યુલોક 
યમલોક 
વરૂણલોક 
સત્યલોક 
બ્રહ્મલોક
Read More »

5 Jan 2017

Whatsapp Ka naya version Ki Full Info

Saal 2017 mai whatsApp tin Naye opsnoc lane  wala Hai To Is ke Bare Mai Full Info Is Prakar Hai


2017 में वॉट्सऐप तीन नए फीचर लाने का प्लान बना रहा है|

सेंट मेसेज एडिट ऑप्शन, मेसेज अनडू ऑप्शन और स्टेटस टैब- ये तीन नए संभावित फीचर हैं, जो वॉट्सऐप 2017 में लाने वाला है|

1 सेंट मेसेज एडिट ऑप्शन
Is Opsnoc Se Aap Sent Kiye Huye Msg Ko Bhi Edit Kar Sakte Hai

2 मेसेज वापस लेने का ऑप्शन
Bhul Se hame KiseSe Msg Send Ho gaya Ho to ham Use Pata Chale Bina Apna Msg Vaps Le Sakte Hai

3 स्टेटस टैब

Read More »

2 Jan 2017

Bhim App ki full Info from Gujarati



BHIM એપને નેશનલ પેમેન્ટ કોર્પોરેશન ઓફ ઈન્ડિયા (NPCI) દ્વારા ડેવલપ કરવામાં આવી છે.

નવી દિલ્હી. ડિજિટલ પેમેન્ટને પ્રોત્સાહન આપવા માટે નરેન્દ્ર મીદીએ શુક્રવારે મોબાઇલ એપ ભીમ લોન્ચ કરી છે. BHIM એપનું પૂરું નામ 'ભારત ઈન્ટરફેસ ફોર મની' છે. આ UPI બેસ્ટ પેમેન્ટ સિસ્ટમ પર કામ કરશે. તેના માટે લોકો ડિજિટલ રીતે પૈસા મોકલી અને મેળવી શકશે. ખાસ વાત એ છે કે આ એપ ઈન્ટરનેટ વગર પણ કામ કરશે. જેમાં યૂઝર્સને બેન્ક એકાઉન્ટ નંબર અને IFSC કોડ જેવી લાંબી વિગતો રજૂ કરવાની જરૂર નહીં રહે.

એપને કેવી રીતે કરાય છે ઓપરેટ?

- કોઈપણ ફોનથી USSD કોડ *99# ડાયલ કરીને આ એપને ઓપરેટ કરી શકાય છે. તે ઈન્ટરનેટ વગર પણ કામ કરશે.
- ભીમને નેશનલ પેમેન્ટ કોર્પોરેશન ઓફ ઈન્ડિયા (NPCI)એ ડેવલપ કરી છે.
- આ પૈસા મોકલવા માટે તમારે માત્ર એકવાર પોતાનો બેન્ક એકાઉન્ટ નંબર રજિસ્ટર કરાવવાનો રહેશે અને એક UPI પિનકોડ જનરેટ કરવો પડશે.
- ત્યારબાદ તમારો મોબાઈલ નંબર પણ પેમેન્ટ એડ્રેસ હશે. દરેક વખતે એકાઉન્ટ નંબર નાખવાની જરૂર નહીં રહે.
- હાલમાં આ એપ હિન્દી અને અંગ્રેજી ભાષાને સપોર્ટ કરશે. ટૂંક સમયમાં જ ક્ષેત્રીય ભાષાઓને પણ તેમાં સામેલ કરવામાં આવશે.


શું-શું કરી શકે છે આ એપ?

ચેક બેલેન્સ - તમારા બેન્ક એકાઉન્ટનું બેલેન્સ ચેક કરી શકશો.
કસ્ટમ પેમેન્ટ એડ્રેસ - તમે તમારા ફોન નંબરની સાથે કસ્ટમ પેમેન્ટ એડ્રેસને પણ એડ કરી શકો છો.
QR કોડ - QR કોડ સ્કેન કરીને પણ તમે કોઈને પેમેન્ટ મોકલી શકો છો. તેના માટે તમારે માત્ર મર્ચન્ટનો QR કોડ સ્કેન કરવાનો રહેશે.
ટ્રાન્ઝેક્શન લિમિટ - 24 કલાકમાં મિનિમમ 10,000 રૂપિયા અને મેક્સિમમ 20,000 રૂપિયા ટ્રાન્સફર કરી શકાશે.

ભીમ એપનો યૂઝ કરવાનો કોઈ ચાર્જ હશે?

આ એપથી ટ્રાન્ઝેક્શન કરવાનો કોઈ ચાર્જ નહીં લાગે. જોકે, IMPS અને UPI ટ્રાન્સફર પર તમારે બેન્ક થોડોક ચાર્જ વસૂલ કરી શકે છે.

આ એપ યૂઝ કરવા માટે મારે શું કરવું પડશે?

આ એન્ડ્રોઈડ (8th વર્ઝનથી ઉપર) અને iOS (5th વર્ઝનથી ઉપર) પર અવલેબલ છે. પ્લેસ્ટોર અને iOS સ્ટોરથી તેને BHIM ટાઈપ કરીને ડાઉનલોડ કરી શકાય છે.

શું આ એપ કોઈપણ મોબાઈલ ઓપરેટિંગ સિસ્ટમ પર કામ કરશે?

આ એપને યૂઝ કરવા માટે તમારે સ્માર્ટફોન, ઈન્ટરનેટ એક્સેસ, UPI પેમેન્ટ સપોર્ટ કરનારા ભારતીય બેન્ક એકાઉન્ટ નંબર અને એકાઉન્ટથી લિંક્ડ મોબાઈલ નંબરની જરૂર રહેશે. એપ દ્વારા બેન્ક એકાઉન્ટને UPIથી લિંક કરવું પડશે.

એપ યૂઝ કરવા માટે મારે મોબાઈલ બેન્કિંગ એક્ટિવેટ કરવું પડશે?

ના, તેના માટે મોબાઈલ બેન્કિંગ એક્ટિવેટ કરવાની જરૂર નથી. માત્ર તમારો મોબાઈલ નંબર બેન્કમાં રજિસ્ટર થયેલો હોવો જોઈએ.

શું તેને યૂઝ કરવા માટે કોઈ ખાસ બેન્કના કસ્ટમર હોવું જરૂરી છે?

ડાયરેક્ટ મની ટ્રાન્સફર માટે તમારે બેન્કનો UPI (Unified Payment Interface) પ્લેટફોર્મ પર લાઈવ હોવું જરૂરી છે. UPI પ્લેટફોર્મ પર એક્ટિવ તમામ બેન્ક આ એપમાં લિસ્ટેડ છે.

હું એપ દ્વારા પોતાના બેન્ક એકાઉન્ટનો UPI પિન કેવી રીતે જનરેટ કરી શકું?

તેના માટે તમારે એપના મુખ્ય મેનૂમાં બેન્ક એકાઉન્ટ પર જઈને Set UPI-PIN ઓપ્શન પસંદ કરવાનું રહેશે. ત્યારબાદ તમને ડેબિટ કાર્ડ/એટીએમ કાર્ડના છેલ્લા 6 ડિજિટ અને કાર્ડની એક્સપાયરી ડેટ પૂછવામાં આવશે. તેને ઈનપુટ કરતા તમારા મોબાઈલ પર OTP આવશે, જેનાથી તમે UPI-PIN સેટ કરી શકશો.

શું હું એપમાં અનેક બેન્ક એકાઉન્ટ એડ કરી શકું?

હાલ ભીમ એપ પર માત્ર એક જ બેન્ક એકાઉન્ટ જોડવાનું ઓપ્શન છે.

શું મારે ભીમ એપને પોતાના બેન્ક એકાઉન્ટ ડિટેલ આપવી પડશે?

રજિસ્ટ્રેશનના સમયે તમારે ડેબિટ કાર્ડ ડિટેલ અને મોબાઈલ નંબર જણાવવાનો રહેશે. કાર્ડ નંબરથી જ તમારી બેન્ક ડિટેલ સિસ્ટમને મળી જશે. તેને અલગથી જણાવવાની જરૂર નથી.

આ બેન્કોના એકાઉન્ટ કરશે સપોર્ટ

અલાહાબાદ બેન્ક, આંધ્ર બેન્ક, એક્સિક બેન્ક, બેન્ક ઓફ બરોડા, બેન્ક ઓફ ઈન્ડિયા, બેન્ક ઓફ મહારાષ્ટ્ર, કેનેરા બેન્ક, કેથોલિક સિરિયન બેન્ક, સેન્ટ્રલ બેન્ક ઓફ ઈન્ડિયા, ડીસીબી બેન્ક, દેના બેન્ક, ફેડરલ બેન્ક, એચડીએફસી બેન્ક, આઈસીઆઈસીઆઈ બેન્ક, આઈડીબીઆઈ બેન્ક, આઈડીએફસી બેન્ક, ઈન્ડિયન બેન્ક, ઈન્ડિયન ઓવરસિસ બેન્ક, ઈન્ડસઈન્ડ બેન્ક, કર્ણાટકા બેન્ક, કરૂર વ્યાસા બેન્ક, કોટક મહિન્દ્રા બેન્ક, ઓરિએન્ટલ બેન્ક ઓફ કોમર્સ, પંજાબ નેશનલ બેન્ક, આરબીએલ બેન્ક, સાઉથ ઈન્ડિયન બેન્ક, સ્ટાન્ડર્ટ ચાર્ટર્ડ બેન્ક, સ્ટેટ બેન્ક ઓફ ઈન્ડિયા, સિન્ડિકેટ બેન્ક, યૂનિયન બેન્ક ઓફ ઈન્ડિયા, યૂનાઈટેડ બેન્ક ઓફ ઈન્ડિયા, વિજયા બેન્ક

આ અપેથી પૈસા મોકલવા માટે તમારે પોતાનો બેન્ક એકાઉન્ટ નંબર રજિસ્ટર કરવાનો રહેશે.
એપ હિન્દી અને અંગ્રેજી ભાષાને સપોર્ટ કરશે.
તમે પોતાના બેન્ક એકાઉન્ટનું બેલેન્સ ચેક કરી શકો છો.
તમારા ફોન નંબર્સની સાથે કસ્ટમ પેમેન્ટ એડ્રેસને પણ એડ કરી શકો છો.

(અહીં ક્લિક કરીને ડાઉનલોડ કરો ભીમ એપ) 

Read More »

28 Dec 2016

Dard bhare bewafa Sms

Hum Bhi Kabhi Muskuraya Karte The,
Ujale Me Bhi Shor Machaya Karte The,
Usi Diye Ne Jala Diya Mere Hatho Ko,
Jis Diye Ko Hum Hawa Se Bachaya Karte The.


Jindagi ki baat karte ho,
Yaha to mot bhi ham se khafa he.
Ham taj q banaye,
apni to mumtaj hi bewafa he.


Har KHUSHI Ki Inteha Ho Gyi
Meri Barbadi Hi Meri WAFA Reh Gyi
Kaise Mang lu PYAR Us BEWAFA Se
Jub Wo BEWAFA Hi Kisi Aur Ki Ho Gyi


Hamain Na Muhabbat Mili Na Pyar Mila
Hum ko Jo Bhi Mila Bewafa Yaar Mila
Apni to Ban Gai Tamasha Zindagi.
Har koi Apny Maqsad ka Talabgar Mila.


kya pata tha pyar krke dil tod jaygi
dil me pyar bhar k muh mod jaygi
ae bewafa
tu jisse b dil lgaygi dekhna
kbi chain ki sans na le paygi.


Sacha pyaar hamesha galat insaan se hota
hai
.
Aur jab ache insaan se hota hai tb galat
waqt pyar hota hai

Chand tare zameen par lane ki zid thi,
Hamein unko apna banane ki zid thi,
Achcha hua woh pehle hi ho gayi bewafa,
Warna unhe pane ko zamana jalane ki zid thi.


Tumhari Har Ek Baat Bewafai Ki Kahani Hain,
Lekin Teri Har Ek Sans Meri Zindagi Ki Nishani H
Tum Aaj Tak Samajh Nhe Paye Mere Is Pyar Ko,
Mere Aansu Bhi Tumhare Liye Sirf Pani Hain..!!



Read More »